पीपीएफ जैसी छोटी बचत योजनाओं से लोगों का मोहभंग, कम ब्याज के बावजूद बैंक खातों में जमा बढ़ी
सामान्य तौर पर बेहतर रिटर्न देने वाले एसेट्स में सेविंग की राशि का निवेश किया जाता है। जब ब्याज दरें ज्यादा थीं तो बैंक फिक्स डिपॉजिट में ज्यादा निवेश किया जाता था। हालांकि, मौजूदा समय में विरोधाभासी हालात हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, 'अब नकारात्मक वास्तविक ब्याज दर नॉर्म क्यों बन गई हैं।' एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्या कांति घोष की ओर से तैयार की गई रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि नकारात्मक वास्तविक ब्याज दरों के बावजूद लोगों ने अपनी सेविंग बढ़ा दी है। लेकिन लोग एहतियात के तौर पर पैसे बचाकर बैंक खातों में जमा कर रहे हैं। भारत के पास घरेलू बचत का बड़ा अनुभव रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के पास घरेलू बचत का बड़ा अनुभव है। विशेष रूप से माना जाता है कि जब वास्तविक ब्याज दर सकारात्मक होती है तो सेविंग बढ़ जाती है और खर्च को भविष्य के लिए स्थगित कर दिया जाता है। हालांकि, ऐसी स्थिति में बचतकर्ता सेविंग के दम पर मौजूदा खपत में बढ़ोतरी कर देता है। दिलचस्प बात यह है कि कमर्शियल बैंकों में स्मॉल सेविंग डिपॉजिट का प्रतिशत काफी क...