बैंक खाते को प्री-वैलिडेट न करने या PAN से अकाउंट को लिंक न करने से भी अटक सकता हैं इनकम टैक्स रिफंड, आसानी से ऑनलाइन चेक करने रिफंड का स्टेटस
आयकर विभाग (इनकम टैक्स डिपार्टमेंट) ने 8 अप्रैल से 11 जुलाई के बीच 21.24 लाख करदाताओं को 71,229 करोड़ रुपए के रिफंड जारी किए हैं। लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं जिन्हें अभी तक अपने रिफंड का इंतजार है। अगर आपका रिफंड अभी तक नहीं मिला है तो इसके कई कारण हो सकता हैं। हम आपको देरी के क्या कारण हो सकते हैं इस बारे में बता रहे हैं।
बैंक अकाउंट का प्री-वैलिडेट होना जरूरी
जिस बैंक खाते में इनकम टैक्स रिफंड आना है उस बैंक खाते को प्री-वैलिडेट (पहले से सत्यापित) करा लें। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के बाद यदि आपका कोई रिफंड बनता है तो वह आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) के जरिए मिलता है। इसके लिए जरूरी है कि आपका बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेट हो ताकि आपको रिफंड मिलने में देरी न हो।
रिटर्न वैरिफाई नहीं करने पर भी लगता है ज्यादा समय
आपने रिटर्न समय पर फाइल कर दिया। आपने बाकी बातों का भी खयाल रखा। लेकिन हो सकता है कि आपने आईटीआर का वैरिफ़िकेशन नहीं किया। जब तक आप वेरिफाई नहीं करेंगे, आपका रिटर्न प्रोसेस नहीं होगा। यानी, जो आईटीआर आपने दाखिल किया है, उसको वेरिफाई करना आवश्यक है। यह भी रिफंड मिलने में देरी का कारण बन सकता है।
आयकर विभाग के ईमेल का जवाब न देना
केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीट ने करदाताओं से कहा है कि वे विभाग की ओर से भेजे गए ई-मेल का जवाब तुरंत दें जिससे उनके मामलों में कर रिफंड तेजी से जारी किया जा सके। आयकर विभाग की ओर से भेजे गए ई-मेल में करदाताओं से उनकी बकाया मांग, उनके बैंक खाते तथा रिफंड में किसी तरह के अंतर के बारे में जानकारी मांगी जाती है। इसकी जानकारी सही समय पर न देने पर भी आपका रिफंड अटक सकता है।
आमतौर पर 2 से 3 महीने में आ जाता है रिफंड
आईटीआर प्रोसेसिंग के बाद लगभग टैक्स रिफंड आने में करीब एक महीने का समय आमतौर पर लगता है। सामान्य रूप से सेंट्रलाइज प्रोसेसिंग सेक्टर से आईटीआर के प्रोसेसिंग को पूरा होने में 2 से 3 महीने का समय लग जाता है।
8 अप्रैल से 11 जुलाई के बीच 71,229 करोड़ रुपए के रिफंड जारी किए
आयकर विभाग ने 8 अप्रैल से 11 जुलाई के बीच 21.24 लाख करदाताओं को 71,229 करोड़ रुपए के रिफंड जारी किए हैं। जारी किए गए रिफंड में 24,603 करोड़ रुपए का रिफंड 19.79 लाख इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स को जारी किया गया। वहीं, कॉरपोरेट टैक्स के तहत 1.45 लाख करदाताओं को 46,626 करोड़ रुपए दिए गए। कोरोना के कारण लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए जल्दी रिफंड लौटाने का काम चल रहा है।
इस तरह चेक कर सकते हैं अपने रिफंड का स्टेटस
- करदाता refundstatuslogin.html पर जा सकते हैं।
- रिफंड स्टेटस पता लगाने के लिए यह दो जानकारी भरने की जरूरत है – पैन नंबर, जिस साल का रिफंड बाकी है वह साल भरिए।
- अब आपको नीचे दिए गए कैप्चा कोड को भरना होगा।
- इसके बाद Proceed पर क्लिक करते ही स्टेटस आ जाएगा।
क्या होता है रिफंड?
कंपनी अपने कर्मचारियों को सालभर वेतन देने के दौरान उसके वेतन में से टैक्स का अनुमानित हिस्सा काटकर पहले ही सरकार के खाते में जमा कर देती है। कर्मचारी साल के आखिर में इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते हैं, जिसमें वे बताते हैं कि टैक्स के रूप में उनकी तरफ से कितनी देनदारी है। यदि वास्तविक देनदारी पहले काट लिए गए टैक्स की रकम से कम है, तो शेष राशि रिफंड के रूप में कर्मचारी को मिलती है।
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