वीडियो डेट्स में सामने वाले इंसान की तरफ आकर्षित हो सकते हैं, लेकिन रियल लाइफ में कोई केमेस्ट्री नहीं होती
कोरोना लॉकडाउन चलते लोग घरों में कैद हो गए थे। भारत में तो इमरजेंसी में ही बाहर जाने के आदेश थे। ऐसे में लोग अकेलापन महसूस करने लगे। यह ह्यूमन बिहेवियर है कि अकेले होने पर हम लोगों से बात करना चाहते हैं। किसी का साथ खोजने लगते हैं। कोरोना में वीडियो कॉल की मदद से लोग एक दूसरे जुड़ें। कई लोग एक दूसरे की तरफ अट्रेक्ट भी हुए। उन्होंने एक दूसरे के साथ वीडियो डेट्स भी की, लेकिन लॉकडाउन के बाद रियल लाइफ में इस तरह के रिलेशनशिप में किसी तरह की केमेस्ट्री नहीं देखी गई।
24 साल की अमेरिकी एक्ट्रेस सेसे बॉयकीन्स लॉकडाउन में इस तरह के एक्सपीरियंस से गुजर चुकी हैं। वह लॉकडाउन में 26 साल की एली के साथ वीडियो डेट्स कर रहीं थी। उस समय दोनों के बीच बहुत अच्छी केमेस्ट्री थी। दोनों में बातचीत इंस्टाग्राम पर शुरू हुई थी। लॉकडाउन से पहले दोनों एक थियेटर में मिली थीं। उन्हें लगता था कि दोनों आगे जाकर रिलेशनशिप में आ जाएंगी। बॉयकीन्स बताती हैं कि हम दोनों एक-दो दिन में एक दूसरे से वीडियो से चैटिंग करते थे। बाकी, समय घंटों तक फोन पर बात करते थे।
कितनी कारगर ऑनलाइन डेटिंग?
- बॉयकीन्स बताती हैं कि चार महीने वीडियो डेटिंग के बाद दोनों के बीच अंतरंग बातें होने भी लगी थी। मुझे याद नहीं कि स्कूल के बाद से कभी किसी से इतनी देर तक बात की हो। हम दोनों ने एक दूसरे से बहुत कुछ सीखा। उस समय महसूस होने लगा था कि हम दोनों रिलेशनशिप में थे।
- लेकिन जब बॉयकीन्स जुलाई में न्यूयॉर्क लौटकर आईं, तो उन्होंने एली को अपने अपार्टमेंट में मिलने बुलाया। यह डेट वीडियो डेट से बिल्कुल अलग थी। असल जिंदगी में दोनों में किसी तरह कि केमेस्ट्री देखने में नहीं आई।
- बॉयकीन्स कहती हैं कि इस बात का उन्हें दुख है। वह दोनों एक दूसरे को अच्छे से जानने लगे थे, जबकि असलियत बिल्कुल उलट थी। अब उन्होंने तय किया है कि आगे से कभी इस तरह के रिलेशनशिप में नहीं आएंगी। बॉयकीन्स का मानना है कि जरूरी नहीं कि जिससे फोन या वीडियो चैटिंग कर रहे हैं, वह असल जिंदगी में भी वैसा हो।
- बॉयकीन्स जैसे कितने ही लोग थे, जिन्हें इस तरह के दौर से गुजरना पड़ा। इस घटना के बाद सवाल तो बनता है कि क्या असल डेटिंग से वीडियो डेंटिंग बेहतर है? इसको लेकर एक्सपर्ट का क्या सोचना है?
क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
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मैरिज फैमिली थेरेपिस्ट जेकलीन मेंडेज कहती हैं कि वीडियो डेट्स करते समय लोग बहुत फैमिलियर होते हैं। आसानी से वे सामने वाले पर भरोसा कर लेते हैं, जो कि गलत है। उन्हें लगता है कि सामने वाले इंसान को जानते हैं, लेकिन लोग उसका एक पक्ष ही जान पाते है।
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जेकलीन कहती हैं कि वीडियो में सामने वाले का प्रेजेंटेशन होता है, जो बनावटी भी हो सकता है। कई बार इसी वजह से हम सामने वाले की तरफ अट्रेक्ट होते हैं।
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जेकलीन कहती हैं कि कई बार अच्छे बिहेवियर के चलते हम सामने वाले इंसान के बारे में ज्यादा सोचने लगते हैं। उसकी पर्सनालिटी को लेकर एक तरह की मन में फेंटेसी डेवलप हो जाती है। वीडियो डेट्स के आधार पर हम उस इंसान को इमेजिन करने लगते हैं।
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वीडियो डेट्स के दौरान हमें लगने लगता है कि सामने वाले इंसान के बारे में सबकुछ जानने लगे हैं, जो बिल्कुल गलत बात है। जिस इंसान को डेट कर रहे हैं, और वह फिजिकली प्रजेंट नहीं रहते है, तो उसे पूरी तरह से नहीं जान सकते हैं।
ऑनलाइन डेटिंग में सामने वाले के बॉडी लैंग्वेज को पढ़ना मुश्किल
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एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वीडियो डेट के दौरान हम सामान्य तौर पर लोगो की तरफ आकर्षित हो सकते हैं। इसकी कई वजह हैं। जैसे - उनकी आवाज का अच्छा लगना। ह्यूमर की वजह से भी आकर्षित हो सकते हैं।
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बॉलकीन्स का कहना है कि हम जिस इंसान की तरफ आकर्षित होते हैं, उसके लिए उसका सामने होना जरूरी है। वीडियो डेंटिंग का सबसे बड़ा नुकसान है कि हम सामने वाले को पूरी तरह से देख नहीं पाते हैं। उसके जैश्चर को समझ नहीं सकते हैं।
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बिहेवियर एक्सपर्ट और एडवाइजर मार्जेट ओड कहते हैं कि हम लोगों को मूवमेंट पर बहुत पर नजर रखते है। उसके चलने, बोलने और सोचने के तरीके पर गौर करते हैं। प्यार के मामलों में इसे और बड़ी गौर से देखा जाता है। जबकि वीडियो डेट्स में इंसान को दो डायमेंशन से ही देख पाते हैं। इसे समझना ब्रेन के लिए बहुत मुश्किल होता है। इसलिए हम सिर्फ वीडियो डेट्स के आधार पर किसी को अपना हमसफर नहीं चुन सकते हैं।
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